अध्याय 25

उसके असामान्य तौर पर नरम, लगभग धोखा देने वाले व्यवहार के सामने मेरी तनी हुई नसें धीरे-धीरे ढीली पड़ने लगीं।

थोड़ी देर पहले की शारीरिक थकान और भावनाओं का उफनता झूला—सब कुछ एक साथ मुझ पर टूट पड़ा। गरम, मुलायम कंबल में लिपटी हुई मैं… उसके आसपास जो दुश्मनी पहले तक महसूस होती थी, वह जैसे गायब हो चुकी थी...

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